Quick Links
Student Corner
Publications
Services

World Rabies Day

उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसन्धान संस्थान, मथुरा में 28 सितम्बर को विश्व रेबीज दिवस के उपलक्ष्य में निःशुल्क श्वान रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डा. गिरिजेश कुमार सिंह जी द्वारा जनपद के पुलिस अधीक्षक यातायात श्री नवल किशोर व कर्नल विजय राव की गरिमामई उपस्थिति में फीता काट कर तथा एक श्वान का टीकाकरण कर किया गया। कार्यक्रम के अन्तर्गत स्थानीय पशुपालकों द्वारा लाये गये 50 कुत्तों को टीके लगाये गये। रेबीज को जलातंक/अलर्क/हाईड्रोफोबिया भी कहते हैं। रेबीज एक वायरस जनित रोग है जिसके लिए सभी स्तनधारी प्राणी (कुत्ता/बन्दर/नेवला/चमगादड़/सियार/लोमड़ी/गाय-भैंस आदि) संवेदनशील होते हैं किन्तु सामान्यतः यह रोग मनुष्य में रेबीज ग्रस्त कुत्तों के काटने से होता है । एक बार लक्षण आने के उपरान्त इस प्राण घातक रोग का उपचार संभव नहीं है किन्तु रोकथाम के टीके से इस रोग को शतप्रतिशत रोका जा सकता है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग 60 हजार मौतें रेबीज के कारण होती हैं जिन्हे टीकाकरण द्वारा रोका जा सकता है। उद्घाटन के उपरान्त विश्वविद्यालय के कुलपति डा. जी. के. सिंह तथा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. पी. के. शुक्ला द्वारा विश्वविद्यालय शिक्षकों के साथ एक बैठक की गई जिसमें रेबीज रोग के विषय में पशुपालकों व सामान्यजन को वैज्ञानिक तथ्य उपलब्ध कराते हुये रेबीज टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर चर्चा करते हुये जोर दिया गया। विश्वविद्यालय पशुचिकित्सालय के निदेशक डा. आर. पी. पाण्डेय व चिकित्सालय अधीक्षक डा. राम सागर के अतिरिक्त बैठक में अन्य संकाय सदस्यों के साथ विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डा. अतुल सक्सेना, अधिष्ठाता बायोटेक डा. राजेश निगम, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. विकास पाठक, विभागाध्यक्ष डा. एम.एम. फारूकी (एनाटाॅमी), डा. अरूण कुमार मदान (फिजियोलाॅजी), डा. रश्मि सिंह (माइक्रोबायलाॅजी) ने चर्चा में भाग लिया।